प्रेगनेंसी प्‍लान करने से पहले पढ़ें ये बेहद जरुरी बातें !


डॉक्टर कहते है न कि बच्चे को बच्चे का साथ ही ज्यादा भाता है। ऐसे में अगर आप भी पहले बच्चे के बाद दूसरे बच्चे कि प्लानिंग के बारें में सोच रहीं है तो, इससे पहले सेकंड प्रेगनेंसी से जुड़ें कुछ महत्वपूर्ण पक्षों पर ध्यान देना जरूरी है।

pregnancy plan,
जैसे कि राय दी जाती है कि दो बच्चों के बीच गैप ज्यादा नहीं होना चाहिए। क्योंकि बच्चों कि पढ़ाई लिखाई और उनके पूर्ण व्यक्तिव विकास में बहुत फर्क पड़ता है। हालांकि दूसरी प्रेगनेंसी से जुड़ी यह सभी बातें सच नहीं है।

 नेक्स्ट प्रेगनेंसी कि प्लानिंग और से सोचे समझे और फिर ही कुछ फैसला करें।

पहले बच्चे कि तरह दूसरे बच्चे का फैसला भी पूर्ण रूप से आप ही का है, इसलिए नेक्स्ट प्रेगनेंसी कि प्लानिंग से पहले अच्छे से हर पहलु को सोचे समझे और फिर ही कुछ फैसला करें।

 डेढ साल का गैप है बेस्ट

pregnancy-pregnancy-guide-second-pregnancy-THS
डॉक्टर् कि मानें तो दो बच्चों के बीच डेढ साल का गैप बिलकुल सही हैं। क्योंकि इससे पहले अगर दूसरे बच्चे के चांस होते है तो इससे मिसकैरिज के चांस ज्यादा हो जाते है। साथ ही ऐसे केस में प्री मैच्योर बेबी होना, बेबी का वजन सही न होना जैसी समस्याएं होती है। जबकि वहीं मां को एनीमिया, यूट्रस इंफेक्शन जैसी समस्याएं होती है।

5 साल का गैप

अगर आप सोच रहे है कि दो बच्चों के बीच पांच साल का गैप हर मायने में सही है तो आप गलत है। क्योंकि ऐसे में थोड़ी परेशानियां हो सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि दूसरी प्रेगनेंसी के दौरान प्री मैच्योर डिलिवरी होना जैसी समस्यां आम होती है। इससे माँ को बहुत परेशानियों का सामना करना पढ़ सकता है |600_ss3_Rose_Colored_Glasses

मां के स्वास्थ्य को खतरा

एक बच्चे के जन्म के बाद मां को पूर्ण रूप से ठीक होना आवश्यक है और पूरी तरह से ठीक होने में समय लगता है । क्योंकि प्रेगनेंसी के दौरान मां कि बॉडी कि एनर्जी और न्युट्रियंट्स निकल जाते है। ऐसे में बॉडी को फिर से नॉर्मल होने में और फिर से एक हेल्दी प्रेगनेंसी के लिए रिकवर करने में समय लगता हैं। ऐसे में कम से कम दो बच्चों के बीच कम अंतर के चलते मां के स्वास्थ्य पर पूरा खतरा बना रहता है।two-babies-shutterstock_129152300-700x

3 साल का गैप

ऐसा अनुमान लगाया जाता है कि एक बच्चे के जन्म के तीन साल में महिला का शरीर एक बार फिर से पूर्ण स्वस्थ्य हो जाता है। साथ ही देश कि जनसंख्या भी काफी हद तक नियंत्रण में रहती है। इसलिए भारतीय सरकार भी दो बच्चों के बीच तीन साल के गैप पर जोर देती है।

बेहतर होते रिश्ते

अगर दोनों बच्चों के बीच समयअन्तराल ज्यादा है तो, ऐसे में बड़ा बच्चा छोटे बच्चे कि लालन पोषण में अहम रोल निभा सकता है। ऐसे में दोनों बच्चों के बीच भावनात्मक जुड़ाव बहुत अच्छा होता है। हालांकि यह भी माना जाता है कि ऐसी परिस्थिति में बड़ा बच्चा मां बाप का ज्यादा ध्यान चाहता है।baby-500

एक ही समय में दो बच्चे

हालांकि इस बात से मुकरना भी गलत होगा कि एक समय पर दो दो बच्चों को संभालना बहुत मुश्किल है। इसलिए दूसरे बच्चें कि प्लानिंग करते वक्त इस प्वाइंट को बिलकुल भी न भूलें। ऐसे में दूसरें बच्चें का फैसला लेना बहुत ही मुश्किल है, इसलिए हर पहलु को सोचे और समझें।
अगर आपको हमारी post उपयोगी लगी हो तो अपने दोस्तों के साथ जरुर शेयर करे और अधिक से अधिक लोगो तक पहुंचाये |


Like it? Share with your friends!

0
, 0 points

प्रेगनेंसी प्‍लान करने से पहले पढ़ें ये बेहद जरुरी बातें !

log in

reset password

Back to
log in