प्रसव पीड़ा का सामना कैसे करें  और प्रसव के बाद महिला की देखभाल भी जरूरी।


प्रसव पीड़ा काफी कष्‍ट वाली होती है। कई महिलायें इस दर्द से इतना डरती हैं कि वे सीजेरिन करवाना अच्छा समझती हैं।

प्रसव पीड़ा यानी लेबर पेन कम करने के कई तरीके हैं। इनमें भी कुछ तरिके तो  दर्द को इस हद तक कम कर देते हैं कि लेबर पेन की पीड़ा का पता ही नहीं हो पाता। इनमें से कुछ उपायों में दवाओं का उपयोग किया जाता है, तो कुछ में दवा की जरूरत नहीं होती।

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दर्द के अहसास काफी हद तक हमारी मानसिक स्थिति पर निर्भर करती है। तो, दर्द कम करने के कई गैर-औषधीय उपाय मानसिक ट्रेनिंग पर निर्भर करते हैं। इनमें से एक तकनीक लमाज (LAMAZE) है। एक अन्‍य तकनीक का नाम ब्रेडली (Bradley) है। ये दोनों तकनीक लेबर की समझ को बढ़ाती हैं जिससे बिना दवाओं के आपके माइंडसेट में बदलाव आता है और दर्द सहने की आपकी क्षमता बढ़ जाती है। ये तकनीक प्रसव के दौरान सांस लेने, रिलेक्‍स होने और सपोर्ट स्‍टाफ द्वारा मसाज करने आदि पर निर्भर होती हैं। ये चीजें प्रसव पीड़ा से आपका ध्‍यान दूर करती हैं। बात जब दर्द सहने की होती है तो सपोर्ट स्‍टाफ और परिवार की भूमिका काफी अहम हो जाती है। ब्रेडली तकनीक में आपका पति अथवा साथी प्रसव के दौरान आपकी सहायता करता है। इससे आप दर्द का कम तकलीफ के साथ सामना कर पाती हैं।

वे महिलायें जो नियमित रूप से शारीरिक व्‍यायाम करती हैं, वे प्रसव पीड़ा का उन महिलाओं की अपेक्षा अधिक आसानी से सामना कर लेती हैं, जो व्‍यायाम नहीं करतीं। एंटेनेटल क्‍लास में आपको कई व्‍यायाम कराये जाते हैं, जो आपकी प्रसव पीड़ा को कम करने में मदद करते हैं।

प्रसव के दौरान, सांसों की गति पर ध्‍यान देकर आप प्रसव पीड़ा की अनुभूति को कम कर सकती हैं। सांस लेने का कोई निश्‍चित तरीका नहीं है। प्रसव के दौरान, आप जिस भी प्रकार से सांस लेने में सहज हों, आप उसे कर सकती हैं। ऐसा कोई एक तरीका नहीं है, जो हर किसी को मदद कर सके।

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पोजीशन बदलने, पैदल चलने से भी महिला को प्रसव के दौरान काफी आराम मिलता है। गुरुत्‍वाकर्षण भी प्रसव की प्रक्रिया को आसान बनाता है। यदि दर्द को मापने के लिए आपको केबल्‍स लगायी गयी हैं, तो आपके लिए चल-फिर पाना संभव नहीं होगा।

कुछ महिलाओं को प्रसव के दौरान पानी से काफी आराम मिलता है। प्रसव के दौरान गर्म पानी से शॉवर लेने या गर्म पानी के टब में नहाने से पीड़ा को कम करने में काफी हद तक मदद मिलती है।

सम्‍मोहन, योग, ध्‍यान, संगीत सुनना आदि कुछ अन्‍य गैर-औषधीय तरीके हैं, जिनसे प्रसव की पीड़ा कम की जा सकती है।

बेशक, ये गैर-औषधीय तरीके आपको प्रसव पीड़ा का बेहतर ढंग से सामना करने के लिए तैयार करते हैं, लेकिन दवाओं के मुकाबले ये कम कारगर होते हैं। तो जिन  महिलाये प्रसव पीड़ा के नाम से ही डर लगता है, वे इन उपायों के बारे में विचार कर सकती हैं। प्रसव के दौरान वे किसी भी समय इन उपायों को अपना सकती हैं।

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एन्‍टोनोक्‍स जो निट्रोरस ऑक्‍साइड और ऑक्‍सीजन का मिश्रण है, एक जांची-परखी दवा है। इस दवा से बनने वाली गैस आपको दर्द में राहत देने का काम करेगी। प्रसव के दौरान जब भी आपको यूटेराइन संकुचन होने लगे और आपको दर्द का अहसास शुरू हो, आप इस दवा का सेवन कर सकती हैं। यह प्रसव के दौरान आजमायी जाने वाली सबसे सामान्‍य प्रक्रिया है।

एपिडूरेल लेबर एनाल्‍गेसिया (Epidural labour analgesia) जिसे आमतौर पर पेनलेस लेबर कहा जाता है, भी प्रसव पीड़ा से काफी हद तक आराम दिलाती है। इस प्रक्रिया में केथिएटर (मूत्रशलाका) को आपकी पीठ पर रखा जाता है। इसी केथिएटर के जरिये पूरी प्रसव प्रक्रिया के दौरान दर्द निवारक दवा महिला के शरीर में पहुंचायी जाती है। लेबर पेन को कम करने का यह सबसे प्रभावी तरीका है। इस उपाय को आजमाने वाली लगभग हर महिला इससे संतुष्‍ट नजर आयी।

यह पता लगाना बेहद मुश्किल है कि किस महिला को किस उपाय से प्रसव पीड़ा में राहत मिलेगी। इसके साथ ही दर्द की तीव्रता का अंदाजा भी प्रसव से पहले नहीं लगाया जा सकता। जैसे ही आपको प्रसव पीड़ा शुरू हो आप इसका अंदाजा लगाना शुरू कर दें। यदि आप इसे सह सकती हैं, तो उसी मैथर्ड के साथ टिकी रहें। कई महिलायें गैर-औषधीय तरीकों को अपनाती हैं, लेकिन दर्द सहनशक्ति से बाहर होने पर वे दूसरे तरीके अपनाने से भी नहीं झिझकतीं। अपने डॉक्‍टर से प्रसव पीड़ा के दौरान दर्द से राहत दिलाने वाले विभिन्‍न तरीकों के बारे में बात करें।

तो, हम आपके दर्द रहित और आनंददायक प्रसव की कामना करते हैं।

गर्भावस्था के दौरान गर्भवती महिलाओं को देखभाल की अतिरिक्त जरूरत पड़ती है। लेकिन इसका ये मतलब नहीं कि गर्भावस्था के बाद केयर की जरूरत नहीं।

गर्भावस्था के बाद नियमित जांच के साथ-साथ आहार, व्यायाम इत्यादि की पर भी ध्यान देना चाहिए।

गर्भावस्था के बाद अधिकतर महिलाएं अपना वजन घटाने की कोशिश करती हैं लेकिन गर्भावस्था के बाद इस बात का भी ख्याल रखना जरूरी हैं कि डॉक्टर की सलाह के बिना कोई भी ऐसी एक्सरसाइज न करें जिससे आपको भविष्य में इसका खामियाजा भुगतना पड़े।

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यदि आप गर्भावस्था के बाद फिट रहना चाहती हैं तो जरूरी है कि आप नियमित रूप से व्यायाम करें लेकिन ऐसे व्यायाम जिसे करने में आपको कोई तकलीफ न हों। गर्भावस्था के दौरान बढ़ा हुआ वजन घटने में वक्त लगेगा।

स्त्रि‍यों को प्रसव के बाद भी उतने ही पोषण की जरूरत होती है जितनी गर्भावस्था के दौरान। ऐसे में विटामिन, कैलारी, प्रोटीन युक्त आहार का सेवन करना चाहिए।

यदि आपकी डिलीवरी नॉर्मल हुई है, तो आपको अधिक दूध के उत्पाद, घी, मक्खन इत्यादि खाना चाहिए ताकि आपके स्तनों में दूध रिसाव अच्छी तरह से हो।

शुरूआत में आप धीरे-धीरे चलना आरंभ करें और चलते समय आरामदायक जूते पहनें।

यदि आप कामकाजी महिला हैं तो प्रसव के 2 महीने बाद ही दोबारा ऑफिस जायें, अगर इस दौरान भी आपको कमजोरी लगे तो अपना समय बढ़ा सकती हैं।

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खाने में ताजे फलों सेवन अधिक मात्रा में करें। ताजे फलों का जूस, फल, हरी सब्जियां और सूप इत्यादि की मात्रा बढ़ा दें।

गर्भावस्था के बाद गेहूं, अनाज, दाल का पानी, दालें इत्यादि खाना बहुत अच्छा रहता है व बच्चे को भी इससे पोषण मिलता हैं। इसके साथ ही पानी का भी अधिक सेवन करें।

गर्भावस्था के बाद भी अपनी दवाईयों का और डॉक्टर के दिशा-निर्देशों  का ध्यान रखें  और प्रसव के बाद भी अपनी जांच नियमित रूप से कराती रहें और हमेशा चिकित्‍सक के संपर्क में रहें।

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