क्या डेट आने के एक हफ्ता पहले आपको भी होती है इसकी टेंशन?


हर महीने जब भी डेट आने वाली होती है , तो बहुत सी औरतों लड़कियों को टेंशन हो जाती है। क्योंकि उन दिनों बहुत सी परेशानियों से गुजरना पड़ता है और व्हाइट डिस्चार्ज भी काफी होता है। पता ही नहीं चलता कि वह व्हाइट डिस्टार्ज है या डेट आ गई है। बल्कि डेट होने वाले महीने की तारीक से चार से पांच दिन पहले आती है। फिर भी पता नहीं क्यों मुझे टेंशन होती है। टेंशन होती है कपड़े गंदे होने की, पेट के नीचे दर्द होने की, बूब्स में दर्द होने की, वजन बढ़ने की आदि। कई बार पेट का निचला हिस्सा इतना फूल जाता है कि खुद के कपड़े भी नहीं आते हैं और रोज इस सोच से रहते है कि ऑफिस में या बाहर क्या पहनकर जाए ? जिससे पेट दब जाए या ढक जाए। सिर्फ एक यही परेशानी नहीं होती, कई बार तो रात में ठीक से नींद भी नहीं आती, जिसकी वजह से आंखों के नीचे के काले घेरे दो गुने हो जाते हैं। लोग कई सवाल करने लगते हैं जैसे कि काम का प्रेशर ज्यादा है क्या या ऑफिस से लेट जा रही हो या रात में सोई नहीं हो आदि।girl-worried-1215261_960_720
हम सभी ने एक कहावत तो सुनी ही है कि कुछ तो लोग कहेंगे, लोगों का काम है कहना। और सच कहूं तो मेरा बिलकुल मन नहीं करता ऐसे लोगों को जवाब देने का, जो मुझसे, मेरे से जुड़े सवाल पूछें। यहां तक की डेट आने के टाइम पर मूड भी बदलता रहता है, जिसे मूड स्वींग कहते हैं। छोटी-छोटी चीजों पर नराज हो जाना और लड़ने लगना बिना यह सोचे कि क्या मुझे ऐसा करना चाहिए था या नहीं।desperate-2100307_960_720
ये सभी चीजें केवल एक ही लड़की महसूस नहीं करती, शायद कई और लड़कियां भी करती हैं, जो ऐसा महसूस करती हैं। यहां तक की कई लड़कियां डेट आने के एक हफ्ता पहले सैनेट्री नैपकिन का इस्तेमाल करना शुरू कर देती हैं, जो वेस्टेज तो है ही, साथ ही पैसे की बर्बादी भी। इस डर से कि कहीं कपड़े न खराब हो जाए या अगर ऑफिस में हूं, तो सबके सामने मैं सैनेट्री नैपकिन कैसे अपने बैग से निकालकर लेकर जाऊंगी।

जब डेट आ जाती है, तब काफी चिढ़चिढ़ी और बेआराम भी फील होती है । किसी काम में मन नहीं लगता। यहां तक की कहीं घर से बाहर निकलने का भी दिल नहीं होता। पेट में बर्दाश न करने वाला दर्द सहना पड़ता है। लेकिन अब इन सभी चीजों की आपको चिंता करने की कोई जरूरत नहीं, क्योंकि इस आर्टिकल में हम आपको बताने जा रहे हैं कि किस तरह आप अपनी डेट को एंजॉय कर सकते हैं और खुद को खुश रखते हुए सुखद महसूस कर सकते हैं।

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ओजोन ग्रूप की चीफ मार्किटिंग ऑफिसर नीता अग्रवाल का कहना है कि “पीरियड्स होना सामान्य बात है। करीब 50 प्रतिशत आबादी को ये नैचरली होता है। पीरियड्स कई बार आपको स्ट्रेस फील कराते हैं, लेकिन इसे लेकर आपको खुश होना चाहिए, क्योंकि पीरियड्स का रेगुलर आना मतलब आपकी बेहतर हेल्थ की ओर इशारा करना है। आपकी बॉडी में बनने वाले नए हार्मोन्स को यह नॉर्मल रखने में मदद करता है। इसलिए इन दिनों खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से मजबूत रखते हुए चीजों को संभालें । ऐसे दिनों में खुद को पैंपर या संतुष्ट करने के लिए घर के पास के सलॉं में फेशल या मेनिक्योर या हॉट बबल बाथ सिटिंग बुक करा सकते हैं। साथ ही खुद का डेली वर्क पूरा करते हुए शरीर को हाइड्रेट रखें।
वर्ल्ड मेन्सट्रूअल डे पर ओजोन1एम ने एक कैंपेन चलाया, जिसका नाम #Thatsmydate था। इस कैंपेन को इवेंट के समय सच्ची सहेली संग लॉन्च किया गया। साथ ही इस कैंपन के द्वारा उन्होंने सभी महिलाओं को पीरियड्स के दौरान खुश रहने और एंजॉय करने की सलाह दी। इसके अलावा उन्होंने महिलाओं को आत्मविश्वास रखते हुए उन्हें पीरियड्स के दिनों में अपने प्राइवेट पार्ट को साफ रखने के लिए भी प्रेरित किया।

साथ ही साथ पीरियड्स के दौरान हम अपने बजन को एसे कर सकते है काबू

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औरत हो या लड़की , पीरियड के समय हर किसी का थोडा बहुत वजन बढ़ना आम है पीरियड के समय पेट दर्द ,कमर दर्द ,उल्टीआना और भी बहुत सी समस्यायों के साथ हर औरत को पीरियड के समय वजन बढने वाली परेशानी से गुजरना पड़ता है | कई महिलाओ में तो महामारी की वजह से बड़ा वजन पीरियड खतम होने तक सामान्य हो जाता है और इन दिनों औरतों को छाती के भारीपन का भी एहसास हो जाता है पीरियड्स के समय ज्यादा से ज्यादा फलो का प्रयोग करना चाहिए और तेलीय और तीखे खाने से दूर रहना चाहिए जितना हो सके संतुलिक भोजन करना चाहिए |

प्रसव पीड़ा का सामना कैसे करें  और प्रसव के बाद महिला की देखभाल भी जरूरी।

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